Saturday, 19 September 2020

कभी खुद को भी याद कर लिया करो

जनम से मौत तक का सफर है काफी सुहाना 

कभी है खुशियों की बौछार, तो कभी गम का फसाना


सुबह से रात तक तू जूझ रहा है औरों के लिए 

फुर्सत के दो पल कभी निकालो तो खुद के लिए 


रोजी रोटी के चक्कर में आज फंसा पड़ा है इंसान 

लोगों से मिलने के है हजारों साधन  फिर भी खुद से अंजान


गप्पें ठहाके दोस्तों के साथ किए

हजारों 

 लेकिन दिन में चंद पल खुद के साथ भी तो बिता लिया करो 


कभी किताब पढ़ लो कभी योग प्राणायाम कर लो

कभी पुरानी पड़ी गिटार बजा लो, कुछ नहीं तो कम से कम गाने ही गुन गुना लिया करो


जिंदगी की छोटी खुशियों से दूर मत रहना यारो

दो पल चैन की साँस लो और कभी खुद को भी याद कर लिया करो।


- *अमेय दिलीप  कानडे*

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